JankariWalah

post

Know who Harshad Mehta was and how his story became important in Indian financial history! - Harshad Mehta scam 1992

Know who Harshad Mehta was and how his story became important in Indian financial history! - Harshad Mehta scam 1992

 

हर्षद मेहता एक प्रसिद्ध भारतीय वित्तीय दलाल और वित्तीय अपराधी (Indian financial brokers and financial criminals) थे, जिन्हें "बिग बुल" के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने 1992 में भारतीय पूंजी बाजार में एक बड़े घोटाले का संचालन किया था, जिसे हाथकड़ी धनोपाय स्कीम के रूप में जाना जाता है।

 

हर्षद मेहता ने अपने ब्रिटिश बैंक ऑफ़ और सिटी बैंक के खातों का उपयोग करके विभिन्न बैंकों के बीच रिपो ट्रेडिंग का प्रबंधन किया और व्यापारिक बैंकों को धोखा देने का काम किया। उनका यह कार्यकलाप वित्तीय बाजार में बड़े हिलेर के रूप में सामने आया और उन्हें बड़े स्तर पर सजा हुई।

 

हर्षद मेहता की कहानी और उनके वित्तीय अपराधों का परिणामस्वरूप भारतीय वित्तीय बाजार में सुधारों की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण परिवर्तनों का कारण बने।

 

  

 

Know how Harshad Mehta died: His story and unheard secrets

हर्षद मेहता की मृत्यु 31 दिसंबर 2001 को हुई थी। उनकी मृत्यु के पीछे का कारण एक दिल की बीमारी थी जिसे अचानक हो गया था। वे मुंबई के एक अस्पताल में अपने आवास में बीमार होने के बाद अचानक निधन हुए थे। उनकी मृत्यु ने वित्तीय दुनिया में विवाद पैदा किया और उनके प्रभाव को दर्शाया, जो बाद में बड़े स्तर पर सुधार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

 

 

Harshad Mehta Scam: Know how he became a victim of fraud

हर्षद मेहता के घोटाले को "हर्षद मेहता स्कैम" कहा जाता है। यह घोटाला 1992 में हुआ था और भारतीय वित्तीय बाजार के क्षेत्र में हुआ था। इसमें हर्षद मेहता ने वित्तीय दलाली और तर्कसंगत खरीददारी के माध्यम से भारतीय बैंकों को बेहलाकर करोड़ों रुपयों की संचयन उपयोग किया था। उन्होंने अपने खातों का उपयोग बड़े पैमाने पर स्टॉक मार्केट में खरीददारी के लिए किया था, जिससे बाजार में उछाल आई और वित्तीय प्रतिष्ठानों में बड़ी बदलावी हुई।

 

हर्षद मेहता के इस घोटाले के बाद, भारतीय वित्तीय बाजार में सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई और सेबी (सेक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) जैसे संचालनालयों का स्थापना हुआ जो वित्तीय बाजार की निगरानी और नियमन करने के लिए बनाए गए।

 


 

Harshad Mehta Case Study: A Unique Study of Indian Financial History

हर्षद मेहता केस स्टडी (Harshad Mehta Case Study):

 

संक्षिप्त विवरण:

हर्षद मेहता केस भारतीय वित्तीय बाजार में हुए एक महत्वपूर्ण घोटाले की कहानी है, जिसने 1992 में बड़े पैमाने पर बदलाव किया। हर्षद मेहता, जिन्हें 'बिग बुल' के नाम से भी जाना जाता था, ने वित्तीय दलाली के माध्यम से भारतीय बैंकों को धोखा देकर करोड़ों रुपयों की संचयन बनाई थी।

 

मुख्य घटनाएँ:

 

घोटाले की शुरुआत: हर्षद मेहता ने एक बड़े स्तर पर घोटाला किया जिसमें उन्होंने वित्तीय दलाली के माध्यम से स्टॉक मार्केट में कई शेयरों की खरीददारी की और उन्हें बेहलाकर बैंकों से उधार लिया।

बैंकों के साथ मिलकर: हर्षद मेहता ने बैंकों के कर्मचारियों को भी विवादित तरीके से शामिल किया और उनकी सहायता से उन्होंने खुद को बैंक के सिस्टम में प्रवेश करने का मार्ग बनाया।

रिपो ट्रेडिंग: हर्षद मेहता ने "रिपो ट्रेडिंग" की विधि का उपयोग किया, जिसमें उन्होंने आवासीय दलालों के माध्यम से बैंकों के बीच पैसे लेन-देन किया और उससे बड़े पैमाने पर लाभ कमाया।

बुरी तरह का प्रभाव: इस घोटाले के परिणामस्वरूप, बैंकों की आर्थिक स्थिति में गंभीर प्रभाव आया और बैंकों के शेयरों का मूल्य भी गिर गया।

उच्च न्यायालय में मुख्य प्रकरण: घोटाले के बाद हर्षद मेहता के खिलाफ मुकदमा चला और उन्हें कई आरोपों में दोषी पाया गया।

सबक और प्रभाव:

 

संशोधन: हर्षद मेहता केस ने भारतीय वित्तीय बाजार में निगरानी और नियमन की प्रक्रिया में सुधार की प्रक्रिया को शुरू किया।

वित्तीय बाजार में परिवर्तन: इस केस ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रति लोगों की आशंकाओं को बढ़ा दिया और उन्हें वित्तीय सावधानी बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर किया।

यह केस भारतीय वित्तीय बाजार के इतिहास में महत्वपूर्ण घटना है जिसने वित्तीय प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया को प्रेरित किया।

 

 

Stock Market Scam of 1992: The Truth You Didn't Know 

1992 का स्टॉक मार्केट घोटाला (Stock Market Scam of 1992):

1992 में हार्षद मेहता के नेतृत्व में एक बड़ा स्टॉक मार्केट घोटाला हुआ था, जिसने भारतीय वित्तीय बाजार को गहरे प्रभाव में डाल दिया। यह घोटाला वित्तीय प्रतिष्ठानों को और बैंकों को लाखों करोड़ रुपयों के नुकसान में डाल दिया और वित्तीय प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया।

 

घटनाक्रम:

 

रिपो ट्रेडिंग की तकनीक: हार्षद मेहता ने घोटाले में "रिपो ट्रेडिंग" नामक तकनीक का उपयोग किया, जिसमें वह बैंकों के बीच पैसे उधार लेते और उन्हें बेहलाते हुए शेयर खरीदते थे।

सहायक दलालों का उपयोग: हार्षद मेहता ने सहायक दलालों का उपयोग करके अपने घोटाले को साक्षात्कार में बचाया।

बैंकों की सहायता: उन्होंने बैंकों के कर्मचारियों को भी अपनी योजना में शामिल किया, जिनकी मदद से वह बैंकों के सिस्टम में प्रवेश करने में सफल हुए।

बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी: हार्षद मेहता ने कई बड़े पैमाने पर बैंकों को धोखा दिया और उन्हें खोखले डॉक्यूमेंट्स के माध्यम से उपायुक्त प्रविष्टियों को प्रस्तुत किया।

घोटाले का पता चलना: बाद में घोटाले का पता चल गया और विभागीय जाँच आरंभ हुई। हार्षद मेहता को कई आरोपों में दोषी पाया गया और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा हुई।

इस स्टॉक मार्केट घोटाले ने भारतीय वित्तीय प्रणाली में उचित सुधार की प्रक्रिया को प्रेरित किया और संशोधन की प्रक्रिया को गति दी।

 

 

What happened after the death of Harshad Mehta? You wouldn't know it! 

हर्षद मेहता की मृत्यु के बाद क्या हुआ, इसके बारे में यहां कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हैं:

 

न्यायिक प्रक्रिया: हर्षद मेहता के वित्तीय अपराधों के बाद, उनके खिलाफ मुकदमा चला और उन्हें कई आरोपों में दोषी पाया गया। 1992 में घोटाले के परिणामस्वरूप हार्षद मेहता, उसके ब्रोकर ब्रदर्स और अन्यों को कई मामलों में दोषी पाया गया और उन्हें कई वर्षों की कारावास की सजा सुनाई गई।

 

वित्तीय सुधार: हर्षद मेहता के केस ने भारतीय वित्तीय प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया को उत्तेजित किया। इससे वित्तीय बाजार में नियमन में सुधार हुआ और संचालनालयों को महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए।

 

सेबी का स्थापना: घोटाले के बाद, सरकार ने सेबी (सेक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया) का स्थापना किया, जो भारतीय वित्तीय बाजार की निगरानी और नियमन के लिए जिम्मेदार होता है।

 

बैंकों की सुरक्षा में सुधार: हर्षद मेहता के माध्यम से बैंकों के साथ हुए घोटाले के बाद, बैंकों ने अपनी सुरक्षा में सुधार किया और आवश्यकता अनुसार नियमों का पालन किया।

 

वित्तीय जागरूकता: हर्षद मेहता के केस ने वित्तीय जागरूकता को बढ़ावा दिया और लोगों को सतर्क रहने और वित्तीय संरचनाओं की समझदारी से निवेश करने की आवश्यकता को उजागर किया।

 

यह घटना भारतीय वित्तीय बाजार में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की शुरुआत थी और उसने वित्तीय प्रणाली को सुधारने की प्रक्रिया को तेजी से बढ़ावा दिया।

Harshad Mehta Case Study

Harshad Mehta Case Study

Harshad Mehta Case Study

Harshad Mehta Case Study